यूपी के रामपुर में दस दिन पहले जन्म लेनेवाली एक बच्ची आपसे कुछ कहना चाहती है, क्या आप सुनेंगे।
आपकी मुन्नी : मेरा कुछ भी नाम हो सकता है ... मान लीजिए मेरा नाम है आपकी मु्न्नी। आपकी मुन्नी को आंखे खोले दस दिन हुए हैं। पिछले आठ महीने से मां के पेट में सोते जागते हर पल आपकी मुन्नी मां के बारे में ही सोचा करती थी, आपकी मुन्नी जानना चाहती थी कैसी होती है मां, आपकी मुन्नी मां की गोद में सोना चाहती थी। लेकिन जब आपकी मुन्नी ने जन्म लिया तो कहीं नहीं थी मां। आपकी मुन्नी को लगा शायद मां पास ही होगी, लेकिन मां नहीं आई, आपकी मुन्नी डर गई, आपकी मुन्नी रोने लगी, लेकिन मां नहीं आई। रो रोकर आपकी मुन्नी सो गई, आंखें खुली तो आपकी मुन्नी इस अस्पताल में थी । यहां आपकी मुन्नी को मां मिली। लेकिन फिर यहां कुछ लोग आ गए। उनका कहना था कि आपकी मुन्नी मां के पास नहीं रह सकती। उनका कहना था कि आपकी मुन्नी का मजहब अलग है और मां का अलग। आपकी मुन्नी को नहीं मालूम था कि मां का भी कोई मजहब होता है। आपकी मुन्नी मां के पास रहना चाहती थी, लेकिन आपकी मुन्नी को मां से अलग कर यहां ( शिशु सदन ) भेज दिया गया। आपकी मुन्नी को मां की बहुत याद आती थी। आपकी मुन्नी बीमार पड़ गई। आपकी मुन्नी ने दूध पीना छोड़ दिया लेकिन आपकी मुन्नी को नहीं मिली मां। डॉक्टर कहते हैं आपकी मुन्नी को सेप्टीसिमिया हो गया है, वो कहते हैं आपकी मुन्नी की चंद सांसे ही बची हैं।

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