मिला वो भी नहीं करते, मिला हम भी नहीं करते
वफा वो भी नही करते, वफा हम भी नही करते
उन्हे रुसवाई का है खौफ, हमें तन्हाई का है गम
गिला वो भी नही करते, शिकवा हम भी नही करते
किसी मोड़ पर टकरा अक्सर जाते है हम
रुका वो भी नही करते, ठहरा हम भी नही करते
जब भी देखते है उन्हें, सोचते है कुछ कहे उनसे
सुना वो भी नही करते, कहा हम भी नही करते
लेकिन ये भी सच है कि मुहब्बत है उनको भी
लेकिन कहा वो भी नही करते, कहा हम भी नही करते

वाह बहुत ही सुन्दर रचना......
जवाब देंहटाएंumda abhivyakti.
जवाब देंहटाएंblog jagat men swagat hai.
इतनी भी क्या बेरुखी । बेहतर । स्वागत है ।
जवाब देंहटाएंमित्रवर, इतना सुंदर नाम होते हुए भी ब्लॉग का नाम बदनाम फरिश्ता रखना, कुछ समझ में नहीं आया। या तो आप अपना असली नाम छिपा लेते तो यही माना जाता कि आप सामने नहीं आना चाहते। लेकिन जब आप आ ही गए हैं तो कम से कम बदनाम फरिश्ता बनकर तो न ही आएं। आगे आपकी मर्जी।
जवाब देंहटाएंमेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
narayan narayan
जवाब देंहटाएंtheek hai bhaayi.....naa gila karo...naa shikvaa....jindgi tab hi acchhe se nibhegi.....aapkaa bhi swaagat hai.....!!
जवाब देंहटाएंvery good amitabh ji achchi rachna lagi..
जवाब देंहटाएंhttp://ajaaj-a-bedil.blogspot.com
बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने ।
जवाब देंहटाएंचिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.
गुलमोहर का फूल
Bahut Barhia... aapka swagat hai...isi tarah likhte rahiye...
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