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कुछ कह नहीं सकता... काफी चिजों को सिखना बाकी है ...

रविवार, 6 सितंबर 2009

जज़्बात

मिला वो भी नहीं करते, मिला हम भी नहीं करते
वफा वो भी नही करते, वफा हम भी नही करते
उन्हे रुसवाई का है खौफ, हमें तन्हाई का है गम
गिला वो भी नही करते, शिकवा हम भी नही करते
किसी मोड़ पर टकरा अक्सर जाते है हम
रुका वो भी नही करते, ठहरा हम भी नही करते
जब भी देखते है उन्हें, सोचते है कुछ कहे उनसे
सुना वो भी नही करते, कहा हम भी नही करते
लेकिन ये भी सच है कि मुहब्बत है उनको भी
लेकिन कहा वो भी नही करते, कहा हम भी नही करते

9 टिप्‍पणियां:

  1. इतनी भी क्या बेरुखी । बेहतर । स्वागत है ।

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  2. मित्रवर, इतना सुंदर नाम होते हुए भी ब्लॉग का नाम बदनाम फरिश्ता रखना, कुछ समझ में नहीं आया। या तो आप अपना असली नाम छिपा लेते तो यही माना जाता कि आप सामने नहीं आना चाहते। लेकिन जब आप आ ही गए हैं तो कम से कम बदनाम फरिश्ता बनकर तो न ही आएं। आगे आपकी मर्जी।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  3. theek hai bhaayi.....naa gila karo...naa shikvaa....jindgi tab hi acchhe se nibhegi.....aapkaa bhi swaagat hai.....!!

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  4. very good amitabh ji achchi rachna lagi..

    http://ajaaj-a-bedil.blogspot.com

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  5. बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने ।

    चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    गुलमोहर का फूल

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  6. Bahut Barhia... aapka swagat hai...isi tarah likhte rahiye...

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